कानपुर : आइआइटी की इस तकनीक से धड़कने लगेगा दिल

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आइआइटी

कानपुर : जी हां, आपको बता दें कि यदि कार्डियोलॉजी में अगर सब कुछ प्लानिंग के अनुसार चलता रहा तो जल्द ही आइआइटी की तकनीक से दिल धड़कने लगेगा। यहां स्टंट समेत कई सस्ते व टिकाऊ उपकरणों के मॉडल तैयार किए जाएंगे। इन्हें जानवरों पर रिसर्च के तौर पर आजमाया जाएगा।

यदि सही नतीजे प्राप्त हुए तो डॉक्टरों के पैनल की सलाह पर मरीजों पर शोध किया जा सकेगा। संस्थान में एनिमल लैब खोलने की योजना बनाई गई है। भेड़, बकरी, कुत्ता, बंदर समेत कई जानवरों रखे जाएंगे। आइआइटी कानपुर के बायोटेक, मैटेरियल और डिजाइनिंग विभाग से बातचीत चल रही है। उपकरणों के डिजाइन डॉक्टर और इंजीनियर मिलकर तय करेंगे। कौन सी धातु के उपकरण लंबे समय तक बने रहेंगे, उस पर भी विचार किया जाएगा।

आइये आपको बताते हैं कि किस तरह के उपकरण बनेंगे :

कानपुर आइआइटी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग और कार्डियोलॉजी विभाग मिलकर एनिमल लैब में काम करेंगे। डिजाइनिंग विभाग उपकरणों के नक्शे तैयार करेगा जबकि मैटेरियल विभाग उसको मूर्त रूप देगा। अधिकारियों की मानें तो डिजाइनिंग विभाग के एचओडी डॉ. शांतनु भट्टाचार्य से बात हो गई है।

कौन से उपकरणों में होगा लाभ : कार्डियोलॉजी में स्टंट, वैस्कुलर ग्राफ्ट और वॉल्व समेत कई उपकरण लगाए जाते हैं। एनिमल लैब में स्टंट वैस्कुलर ग्राफ्ट और वॉल्व पर रिसर्च होगी।

त्रिवेंद्रम में चल रही लैब : त्रिवेंद्रम स्थित श्री चित्र इंस्टीट्यूट में एनिमल लैब चल रही है। वहां कई भेड़ों में स्टंट लगाए गए हैं। कार्डियोलॉजी के दो सर्जनों को वहां भेजा जाएगा।