दुनिया भर में बच्चों के कोरोना मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. ऐसे में भारतीय राज्यों ने बच्चों को वैक्सीन डोज लगाने के बड़े लक्ष्य रखे हैं. सिर्फ गुजरात इस हफ्ते 36 लाख से ज्यादा बच्चों को वैक्सीनेट करना चाहता है.भारत ने सोमवार से 15 से 18 साल तक के बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगाने की शुरुआत कर दी है. दुनिया की सबसे बड़ी किशोर जनसंख्या को वैक्सीनेट किए जाने का यह कदम नए कोरोना वेरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से तेजी से कोरोना मामले बढ़ने के डर के बीच उठाया गया है. कई राज्यों ने कड़े कोरोना प्रतिबंध भी लगाए हैं. पूरे भारत में राज्य सरकारों ने स्कूलों, हॉस्पिटल और वैक्सीनेशन के लिए बनाई विशेष जगहों पर बच्चों को वैक्सीन डोज देने की शुरुआत कर दी है. इस दौरान घनी आबादी वाले शहरों पर खास ध्यान दिया जा रहा है. बच्चों के वैक्सीनेशन के लिए वैक्सीनेशन सेंटर बनाए गए प्राइवेट और पब्लिक स्कूलों की संख्या को दोगुना किया जा रहा है. साथ ही स्कूल प्रशासन को रोज के वैक्सीनेशन आंकड़ों को राज्य सरकारों को भेजने के आदेश दिए गए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले हफ्ते बताया था, “सरकार बच्चों को सिर्फ भारत बायोटेक की ‘कोवैक्सीन’ की डोज दे रही है क्योंकि भारत में अब तक सिर्फ इसे ही 15-18 साल के बच्चों पर आपात इस्तेमाल के लिए लिस्ट किया गया है” बच्चों में बढ़ रहे कोरोना मामले संयुक्त राष्ट्र की बच्चों से जुड़ी एजेंसी यूनिसेफ का अनुमान है कि भारत में दुनिया की सबसे बड़ी किशोर आबादी है.

यहां 25 करोड़ से भी ज्यादा लड़के-लड़कियां हैं. गुजरात राज्य के हेल्थ कमिश्नर जय प्रकाश शिवहरे ने कहा, “बच्चों को उनके स्कूलों में ही वैक्सीन दी जाएगी. वे वैक्सीनेशन सेंटर पर भी जाकर टीका लगवा सकते हैं… वे बिना रजिस्ट्रेशन भी जा सकते हैं” अमेरिका सहित कई देशों में बच्चों में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में सिर्फ गुजरात में इस हफ्ते 36 लाख बच्चों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी डेटा के मुताबिक पिछले 24 घंटों में 33 हजार से भी ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं. इस दौरान 123 नई मौतें हुई हैं. अब तक भारत में कोरोना से करीब 4 लाख 82 हजार मौतें हो चुकी हैं.

हालांकि सरकारों का कहना है कि घबराने की बात नहीं है क्योंकि जहां मामलों में तेजी आ रही है, वहीं इनमें से ज्यादातर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आ रही. राज्यों ने भी लगाई पाबंदियां भारत में अब तक कुल 3.5 करोड़ से ज्यादा कोरोना संक्रमण के मामले आ चुके हैं. फिलहाल सामने आ रहे संक्रमण के मामलों में ओमिक्रॉन के मामले भी शामिल हैं. नए वेरिएंट के ज्यादातर मामले दिल्ली और मुंबई शहरों से सामने आए हैं. अब तक भारत में 1700 से ज्यादा ओमिक्रॉन के मामले आ चुके हैं. जिसमें सबसे ज्यादा संक्रमण के मामले महाराष्ट्र से सामने आए हैं. फिर से बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए कई राज्यों ने नई पाबंदियां लगाना शुरु कर दिया है. जिसमें नाइट कर्फ्यू, बार और रेस्टोरेंट में बैठने से जुड़ी पाबंदियां, बड़ी सभाओं पर रोक आदि शामिल हैं. इस तरह की पाबंदियां लगाने वाला नया राज्य पश्चिम बंगाल है. यहां सरकार ने रविवार को सभी स्कूलों और कॉलेजों को भी बंद किए जाने का आदेश दिया है.

ओमिक्रॉन को लेकर चिंता भारत ने पिछले साल अप्रैल और मई में कोरोना की दूसरी लहर का भयंकर प्रकोप झेला था. इस लहर के पीक के दौरान भारत में रोजाना 4 लाख से भी ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे थे. उस दौरान मामलों के पीछे कोरोना के डेल्टा वेरिएंट को वजह माना गया था. जिससे देश की स्वास्थ्य प्रणाली को तगड़ा झटका लगा था. लोगों को बेड और मेडिकल ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई थी और इस दौरान लाखों लोगों की जान गई थी. ऐसे में जानकार तेजी से फैलने वाले ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर चिंतित हैं. जानकारों ने भारत के चुनाव आयोग की ओर से पिछले हफ्ते उत्तर प्रदेश में चुनाव पर कोई रोक न लगाने को लेकर भी चिंता जताई है क्योंकि 20 करोड़ से ज्यादा जनसंख्या वाले इस राज्य में चुनावों के दौरान कोरोना बहुत तेजी से फैल सकता है. भारत में अब तक 90 फीसदी लोगों को कोविड वैक्सीन की एक डोज और करीब 64 फीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लगाई जा चुकी है. लेकिन सरकार को सभी वयस्कों के लिए बूस्टर डोज के मामले पर अब भी फैसला लेना है. एडी/एमजे (एपी, रॉयटर्स).