विस्फोटक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद एनआईए विस्फोटक कांड की जांच में जुट गई है। एनआईए की जांच में सीसीटीवी कैमरों से विस्फोटक मामले में कोई सुराग नहीं मिला है। एनआईए की टीम ने विधानसभा को सील कर दिया गया है। किसी का भी अंदर जाना मना हो गया है।

वहीँ विधानसभा में एक बार फिर से संदिग्ध पावडर मिला है। शुक्रवार रात सदन में जांच के दौरान सफेद पाउडर मिला था, जिसके बाद इसकी जांच के लिए इसे एटीएस को सौंपा गया है। हालांकी अभी तक इस पावडर के विस्फोटक होने की पुष्टि नहीं हुई है। ये पाउडर एनआईए और एटीएस की जांच में मिला है।

NIA पाउडर की दुबारा कराएगी जांच
विधानसभा में मिले विस्फोटक की दोबारा जांच होगी। NIA और सुरक्षा एजेंसियां पाउडर की दोबारा जांच हैदराबाद के CFL से कराना चाहती है। स्टेट फॉरेसिंक लैब ने इसे PETN बताया है। रकार इसकी दोबारा जांच करा सकती है।

जांच में CCTV कैमरे मिले ख़राब
शुक्रवार देर रात दोनों टीमों ने विधानसभा के चप्पे-चप्पे और सीसीटीवी फूटेज की भी जांच की। इस जांच के दौरान कॉरिडोर के सीसीटीवी कैमरे खराब मिले है। बता दें कि हॉल के सभी 6 कैमरे चालू थे लेकिन वो तभी तक चलते है जब तक सदन चलता है, हॉल के गेट बंद होने के बाद हाल के सीसीटीवी कैमरे बंद हो जाते हैं।

जैश-ए-मोहम्मद ऑडियो टेप
हाल ही में आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ धमकी दी। ये संदेश आतंकवादी मसूद अजहर खुद द्वारा लिखे गए हैं और उनके एक सहयोगी द्वारा ऑडियो रिकॉर्ड किया गया है। भारत के सबसे ज्यादा जरूरी आतंकवादी मसूद अजहर ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इजरायल दौरे के खिलाफ गुस्सा व्यक्त किया। एनआईए विस्फोटक और जैश-ए-मोहम्मद के कनेक्शन की भी जांच करेगी।

12 जुलाई को मिला था PETN
12 जुलाई की सुबह यूपी विधानसभा के अंदर विस्फोटक मिलने का खुलासा हुआ था। फौरेंसिक जांच में PETN विस्फोटक के रूप में इसकी पुष्टि हुई। यह विस्फोटक 50-60 ग्राम की मात्रा में मिला है। ये विस्फोटक समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज पांडे की सीट के नीचे मिला है।

सुरक्षा को लेकर हाई लेवल मीटिंग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल देर शाम सुरक्षा को लेकर हाई लेवल मीटिंग भी की. इसमें गृह सचिव, डीजीपी, एनआईए , एटीएस और इंटेलिजेंस पुलिस के बड़े अफसर शामिल हुए। इस मीटिंग में विधानसभा की सुरक्षा को और पुख्ता करने पर चर्चा हुई।

इन 5 प्वाइंटों से जानें PETN के बारे में-
1) क्या होता है?
पेंटाएरीथ्रीटोल ट्राइनाइट्रेट यानी PETN बेहद पावरफुल प्लास्टिक एक्सप्लोसिव है। ये व्हाइट पाउडर चरमपंथियों, आतंकियों के बीच पॉपुलर है क्योंकि ये ब्लैक मार्केट में आसानी से मिलता है और चेक प्वाइंट्स पर इसकी जांच बेहद मुश्किल है।

2) भारत में इस्तेमाल कब हुआ?
7 सितंबर 2011 को दिल्ली हाईकोर्ट में हुए ब्लास्ट में PETN का इस्तेमाल किया गया था। इस ब्लास्ट में 17 लोग मारे गए थे और 76 लोग घायल हुए थे। इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि ब्लास्ट में PETN की काफी कम मात्रा इस्तेमाल की गई थी, मगर उसने काफी बड़ा नुकसान किया।

3) जांच मुश्किल क्यों?
दिल्ली HC ब्लास्ट के बाद तब इंटरनल सिक्युरिटी सेक्रेटरी रहे यूके बंसल ने बताया था कि लो मॉलीक्यूल्स होने के चलते PETN मेटल डिटेक्टर में पकड़ नहीं आता। स्निफर डॉग्स भी कई बार इसे नहीं पकड़ पाते हैं।

4) क्यों खतरनाक है?
सिक्युरिटी इक्विपमेंट्स की पकड़ में ना आने की वजह से PETN आतंकवादियों की पसंद है। इसकी केवल 100 ग्राम मात्रा ही एक कार में ब्लास्ट करने के लिए काफी है।

5) कब-कब इस्तेमाल हुआ?
2001: शू बॉम्बर के नाम से मशहूर टेररिस्ट रिचर्ड रीड ने मियामी से जाने वाले अमेरिकन एयरलाइंस जेट पर इसका इस्तेमाल किया था।
2009: अलकायदा मेंबर उमर फारुख अब्दुलमुतल्लब ने नॉर्थवेस्ट जाने वाली एक फ्लाइट में PETN के इस्तेमाल की कोशिश की, मगर वह नाकाम रहा। वो अपने अंडरवियर में एक्सप्लोसिव छिपाकर ले गया था और पकड़ा गया।
2010: इस साल अक्टूबर महीने में यमन से अमेरिका जाने वाले एक कार्गो प्लेन में PETN मिला था।
2011: दिल्ली हाईकोर्ट में ब्लास्ट किया गया था।

कैसे पहुंचा होगा विस्फोटक:

विधानसभा के गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहते है। मेटल डिटेक्टर के साथ सुरक्षाकर्मी खड़े रहते हैं। लेकिन हैरानी की बात ये है कि मल्टी लेयर सुरक्षा घेरे को तोड़कर कोई विस्फोटक लेकर कैसे पहुँच गया? वहीँ इस पूरे घटनाक्रम में साजिश से इंकार भी नहीं किया जा सकता है । इस प्रकार की वारदात के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विस्फोटक नीले रंग के पॉलीथीन में रखा गया था। जब राजधानी स्थित विधानसभा सुरक्षित नहीं है तो पूरे प्रदेश में सुरक्षा के प्रबंध कैसे होंगे? ATS को इस मामले में जाँच के आदेश दिए गए हैं । इसमे आतंकी साजिश में2011 में दिल्ली हाइकोर्ट के बाहर हुए धमाके में petn का इस्तेमाल किया गया था। ये एक गंधहीन पदार्थ होता है और इसको X-रे मशीन भी नहीं पकड़ पाती है। ये छोटी से छोटी मात्रा में बढ़ा धमाका कर सकता है। वहीँ ये भी बात सामने आई है कि सदन के भीतर जाने वालों की तलाशी नहीं होती है। ऐसे में सुरक्षा में हुई इस चूक की जवाबदेही किसकी होगी?

सुरक्षा में चूक पर विपक्ष का वार-
समाजवादी पार्टी के नेता घनश्याम तिवारी ने कहा कि इस तरह की चूक काफी चिंताजनक है। यूपी विधानसभा प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण जगहों में से एक है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश की सुरक्षा पुख्ता करनी चाहिए। वहीं कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने इस मुद्दे पर कहा कि लखनऊ शहर में डकैती हो रही है, पूरे प्रदेश में क्राइम में इजाफा हो रहा है। इस बीच विधानसभा की सुरक्षा में इस प्रकार की चूक काफी चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षा की बात करती है, मगर बीजेपी की सरकार ने प्रदेश और देश का बुरा हाल कर दिया है। अखिलेश प्रताप सिंह ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सुरक्षा में इस तरह की चूक ये दिखाती है कि देश बदल रहा है।