शनि की साढ़ेसाती है विनाशकारी, जानिये कैसे बचें दुष्प्रभावों से

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Shanidev

प्रायः शनि की ढईया और साढ़े साती को को लेकर लोगों के दिलों में ख़ासा डर व्याप्त रहता है. हिन्दू कथाओं के अनुसार बड़े-बड़े देवताओं तक को शनि ने भीषण दुख दिए हैं। जब श्री राम को साढ़ेसाती आई तो वनवास हो गया, रावण पर साढ़ेसाती आई तो राम-लक्ष्मण ने सेना लेकर लंका पर चढ़ाई कर दी और रावण के कुल का विनाश कर दिया। जब द्रौपदी पर शनि की साढ़ेसाती आई तो उसकी बुद्धि को भ्रमित कर बुरे वचन कहलवाए जिसके कारण पांडवों को वनवास भोगना पड़ा।

ऐसे में लोगों को अक्सर ये जानने की उत्सुकता होती है कि कैसे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्परिणामों से बचा जाए. आज हम आपको कुछ ऐसे ही उपाय बताने जा रहे हैं जिनसे शनि की साढ़ेसाती के पीड़ित व्यक्तियों को राहत मिलती है.

 

मान्यता है शिव की उपासना करने वालों को इससे राहत मिलती है। इसलिए जो भी इससे शनि की साढ़ेसाती से पीड़ित हो उसे नियमित रूप से शिवलिंग की पूजा व अराधना करनी चाहिए। साथ ही पीपल वृक्ष शिव का रूप माना जाता है, वैसे इसमें सभी देवताओं का निवास मानते हैं, अतः पीपल को अर्घ्र देने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा हनुमान जी को भी रुद्रावतार माना जाता है। अतः उनकी आराधना भी इसके निवारण हेतु फ़लदायी होती है।

 

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