नवरात्रों में कर डाला ये काम तो नवग्रह के कष्टों से मिलेगी मुक्ति

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यह प्रयोग आप नवरात्रि के किसी भी दिन प्रात: 6 से 8 के मध्य करें। यह संभव न हो तो किसी भी रविवार को करें। दिशा-पूर्व, आसन-वस्त्र जो उपलब्ध हो। पीपल वृक्ष के नीचे की थोड़ी-सी मिट्टी एक दिन पहले ही ले आएं, उसमें थोड़ा कुमकुम, चंदन, हल्दी,तथा मेहंदी मिलाएं और पानी से गिला कर एक गोल लड्डू की तरह पिंड बना लें। अब घी में सिंदूर मिलाकर इस पिंड के ऊपर लेप कर दें। कोई हिस्सा खाली न रहे। यह सारी क्रिया एक दिन पहले ही कर लें।

अब प्रयोग के समय सामने लाल वस्त्र पर अक्षत की ढेरी बनाएं और उस पर यह पिंड स्थापित कर दें। गुड़ का भोग अर्पण करें, घी का दीपक लगाएं। नवग्रह शांति का संकल्प लेकर, किसी भी माला से तुलसी की माला को छोड़कर 11 माला मंत्र जाप कीजिए, जाप के बाद पिंड को अक्षत और वस्त्र सहित किसी पीपल वृक्ष के नीचे रख आएं या जल प्रवाह कर दें। भोग स्वयं खा लें। इस एक छोटे से प्रयोग से अगले 3 वर्षों तक नवग्रह अनुकूल हो जाते हैं, वे साधक को कोई कष्ट नहीं देते फिर भी समय-समय पर इसे करते रहना उचित है इससे आपको और बल प्राप्त होगा।

मंत्र
ह्लीं हूं ह्लीं फट्

नवरात्रि के दिनों में नवग्रह बीज मंत्रों की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। नवग्रह शांति संकल्प लेकर ग्रहों के मंत्रों का जाप करें-

सूर्य बीज मंत्र – ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:

चन्द्र बीज मंत्र – ऊँ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:

मंगल बीज मंत्र- ऊँ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:

बुध बीज मंत्र – उँ ब्रां ब्रीं ब्रौ स: बुधाय नम:

गुरु बीज मंत्र – ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:

शुक्र बीज मंत्र – ऊँ द्रां द्रीं द्रौ स: शुक्राय नम:

शनि बीज मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:

राहू बीज मंत्र – उँ भ्रां भ्रीं भौं स: राहुवे नम:

केतु बीज मंत्र – उँ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं स: केतवे नम:

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