23 फरवरी से लग रहा है होलाष्टक, 1 मार्च तक ना करें कोई शुभ काम

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 भारत त्योहारों का देश है तथा साल भर कोई न कोई त्योहार आता ही रहता है परंतु साल भर के सभी त्योहारों का अंतिम त्यौहार होली माना गया है। तभी तो कहते हैं ‘राखी लाई पूरी, होली लाई भात’। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से अगले 8 दिन होलाष्टक के रूप में मनाए जाते हैं और यह पूर्णिमा को सम्पन्न होते हैं। इस दिन गंध, पुष्प, नैवेद्य, फल, दक्षिणा आदि से भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। इस साल 23 फरवरी से होलाष्टक आरम्भ हो रहे हैं तथा यह 1 मार्च तक चलेंगे।

स्नेह और प्रेम का त्यौहार है होली
वैसे तो भारत को त्योहारोंका देश कहा जाता है क्योंकि सबसे अधिक त्यौहार मनाने की परम्परा भी भारत की ही है। होली का उत्सव परस्पर प्रेम एवं भाईचारे को बढ़ाने वाला है। इस दिन यदि कोई शत्रु भी वैर-विरोध मिटाकर एक-दूसरे पर रंग लगाता है तो पुरानी शत्रुता समाप्त हो जाती है।

क्या न करें?
होलाष्टक शुरू होने पर कोई भी शुभ एवं मंगलकारी कार्य नहीं करना चाहिए, अर्थात कोई भी विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, किसी भवन का शिलान्यास, नया बिजनैस, नया वाहन अथवा कोई नई वस्तु खरीदना आदि कोई भी शुभ एवं मांगलिक कार्य करना निषेध माना जाता है।

2 मार्च को लगेगा होला मेला
होलाष्टक 1 मार्च तक चलेंगे तथा होलिका दहन 1 मार्च की रात को होगा। पूर्णिमा वाले दिन लोग एक-दूसरे पर रंग लगाकर खुशी का इजहार करेंगे तथा होली पर्व मनाया जाएगा, 2 मार्च को होला मेला श्री आनंदपुर साहिब और श्री पांवटा साहिब में होगा।

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