पांचवें ‘भारत उत्सव’ कार्यक्रम में श्रीगुरु पवन सिन्हा ने दिया स्वामी विवेकानंद पर अद्भुत व्याख्यान

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Shriguru Pawan sinha, Paavan Chintan Dhara, Bharat Utsav, Rana Yashwant, Swami Vivekanand

गाज़ियाबाद: ग्राम हिसाली, ग़ाज़ियाबाद स्थित पावन चिंतन धारा आश्रम ने 26 जनवरी की पूर्वसंध्या को पांचवें ‘भारत उत्सव’ कार्यक्रम का आयोजन हिंदी भवन में किया। ठसाठस भरे हॉल में आश्रम के संस्थापक ‘श्रीगुरु पवन जी’ ने ”स्वामी विवेकानंद – एक सनातन योद्धा” विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।

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इस अवसर पर युवा अभ्युदय मिशन (YAM) द्वारा बनाये गए गान का भी वीडियो लोकार्पण किया गया जिसे सुश्री आकांक्षा शर्मा, अभिषेक शर्मा तथा मयंक विज ने बनाया है। साथ ही डॉ कविता अस्थाना, सचिव पावन चिंतन धारा आश्रम द्वारा लिखित पुस्तक ‘मेरी डायरी’ का लोकार्पण भी किया गया। इस पुस्तक में डॉ कविता अस्थाना ने अपने तथा श्रीगुरु पवन जी के संस्मरणों का वर्णन किया है।
इस अवसर पर देश के अनेक स्थानों से लोग श्रीगुरु पवन जी को सुनने के लिए पधारे। पवन जी ने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से विद्यार्थियों तथा युवाओं को वो सूत्र दिए जिनसे वे अपने जीवन के हर क्षेत्र में श्रेष्ठता को प्राप्त करने के साथ ही ईश्वरीय दिव्यता के दर्शन भी कर सकें। उन्होंने कहा की शिक्षा के वास्तविक मायने मनुष्य बनाना है। परन्तु आधुनिक शिक्षा साधारण विद्यार्धी को विलक्षण बनाने में असफल रही है और मनुष्यता तो बिलकुल भी नहीं सिखा पाई। साथ ही माता पिता भी युवाओं को संस्कार देने में अधिक सफल नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि उन्हें स्वयं भारत और भारतीय संस्कारों के बारे में नहीं पता तो वे भारतीय संस्कार कहाँ से देंगे।

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श्री पवन जी ने कहा की हज़ारों स्कूलों और संस्थानों के पोस्टरों पर छपे स्वामी विवेकानंद के बारे में इस देश को सिर्फ ‘शिकागो भाषण’ ही याद रहता है, जबकि स्वामी जी से पूरी दुनिया आज भी कितना कुछ सीख रही है। स्वामी जी ने पूरी दुनिया में भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की धारा प्रवाहित की. उन्होंने किसी भी धर्म या संस्कृति की आलोचना नहीं पर भारतीय संस्कृति को हीन नहीं माना| वो मानसिक गुलामे के घोर आलोचक थे| उन्होंने धर्म परिवर्तन की भी घोर आलोचना की| वो कहते थे कि किसी भी धर्म की अच्छी बाते सीखने के लिए उस धर्म में परिवर्तित होना क्यों आवश्यक है|
स्वामी जी ने विद्यार्थियों व युवाओं का आह्वाहन किया कि तुम्हारे जीवन का लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा की मजबूत तन तथा एकाग्रता की शक्ति ही तुम्हें तुम्हारे लक्ष्य तक पहुंचा सकती है। श्री पवन जी ने विद्यार्थियों को पढ़ाई तथा युवाओं को कार्य करने के वो सूत्र बताये जो स्वामी जी ने सिखाये थे। उन्होंने कहा कि इन सूत्रों का पालन किया तो भाग्य तुम्हारे पास चलकर आएगा ही।
श्री गुरु पवन जी ने स्वामी जी द्वारा दिए गए आध्यात्मिक सूत्रों में ‘ध्यान’ तथा ‘समाधि’ की अवस्थाओं का उल्लेख किया तथा दिव्य जीवन जीने की कला लोगों को बताई। उन्होंने आगे कहा ईश्वर के दर्शन संभव हैं जो लोग मन को श्मशानवत कर लेते हैं अर्थात जिनके मन में अहंकार, स्वार्थ, ईर्ष्या कुछ शेष नहीं रह जाता उन्हें ईश्वर के दर्शन सुलभ होतें हैं। मनुष्य स्वयं को साधने का अभ्यास करे, ध्यान करे, शांत हो, परमार्थ हेतु काय करे और प्रेम करना सीखे तो इश्वर दर्शन संभव है. पवन जी ने आगे कहा धर्म मनुष्यता और दिव्यता सिखाता है। यह जीवन को सरल करता है न की अन्धविश्वास और भय में उलझाकर मनुष्य को ईश्वर से दूर करता है। उन्होंने स्वामी जी के जीवन से ऐसे प्रसंग सुनाये जिनसे भारत में सामाजिक समानता आ सकती है। उन्होंने बताया की स्वामी जी कहते थे की एक बार में एक ही लक्ष्य चुनो और उसमे एकाग्र हो जाओ, कुछ और मत सोचो, अफलताओं का डटकर मुक़ाबला करो तो सफलता निश्चित ही तुम्हारे कदम चूमेगी। उन्होंने कहा कि आज लोगों में धैर्य एवं मेहनत का स्थान शॉर्टकट, चापलूसी, मानसिक दरिद्रता तथा अधकचरे ज्ञान ने ले लिया है जिसके कारण ज्ञान नहीं मिलता तथा सफलता स्थाई नहीं रह पाती। उन्होंने आगे कहा युवा यदि कुछ बड़ा करना चाहतें हैं तो पहले अपने ज्ञान एवं व्यक्तित्व को निखारें तो धन उनके पीछे पीछे चलेगा।

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उन्होंने कहा कि विद्यार्थी थोड़ा ही पढ़ें पर नियमित पढ़ें और जो पढ़े उंगली रखकर उसे बोलते हुए पढ़ें तो उन्हें जल्द याद हो जाएगा.
उन्होंने कहा की लोग ये नहीं जानते कि स्वामी जी की भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में बड़ी भूमिका थी। वो देश में घूम घूम कर युवाओं को अंग्रेज़ों को विरुद्ध करते थे तथा उन्हें अंग्रेजी साम्राज्य को ध्वस्त करने की नीति सिखाते थे जिस कारण उन पर तथा उनके द्वारा स्थापित संगठन पर हमेशा अंग्रेज प्रशासन की नज़र रहती थी। अंग्रेज़ सरकार की 1918 में आयी देशद्रोह समिति रिपोर्ट में उन्हें अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का आरोप सिद्ध किया गया था। गुरु पवन जी ने बताया कि स्वामी जी ने तिलक, अरविंदो घोष, सुभाष बोस, विनोबा भावे, टैगोर तथा गाँधी जी पर विशिष्ट प्रभाव छोड़ा और उन सहित हज़ारों युवाओं को अंग्रेज सरकार के विरुद्ध राष्ट्र जागरण हेतु खड़ा किया।

पवन जी ने कहा कि आज भारतीय समाज ने भारत के इतिहास, धर्म की वैज्ञानिकता तथा मर्यादाओं को समझना बंद कर दिया जिसके फलस्वरूप राष्ट्रकर्म, राष्ट्रधर्म तथा नैतिकता में भारी गिरावट हुई। उन्होंने कहा कि बलात या लालच से किया गया धर्मांतरण जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए और ऐसा करने वालों पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए| उन्होंने कहा कि समाज को बच्चों एवं युवाओं को प्रेम देना सीखना होगा।

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