इन्टरनेट यूजर को नहीं पता होगा की वह माउस भी हिलाता है, तो इसकी जानकारी भी जुटाता है फेसबुक

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कैम्ब्रिज एनालिटिका डेटा लीक विवाद के बाद से फेबसुक लगातार सवालों के घेरे में है. अब फेसबुक ने माना है किया है कि- वो यूजर की निजी जानकारी, पसंद-नापसंद जानने के लिए उसके कम्प्यूटर की-बोर्ड और माउस के मूवमेंट तक पर नजर रखता है. यानी अगर आपके कम्प्यूटर पर फेसबुक लॉगइन है, तो माउस के हर क्लिक और की-बोर्ड के हर इस्तेमाल की खबर फेसबुक तक पहुंच रही है.

इस जानकारी से फेसबुक ये पता लगाता है कि यूजर्स किस तरह के कंटेंट पर कितनी देर तक ठहरते हैं. इस जानकारी का ही उपयोग कर फेसबुक यूजर को विज्ञापन दिखाता है. डेटा लीक स्कैंडल के बाद फेसबुक ने अमेरिकी संसद के उच्च सदन यूएस सीनेट को अपने जवाब दिए. कंपनी ने 225 पेज के डॉक्यूमेंट में करीब 2 हजार सवालों के जवाब दे दिए हैं.

कैम्ब्रिज एनालिटिका डेटा लीक के बाद से फेसबुक की प्राइवेसी पॉलिसी लगातार सवालों के घेरे में है. अमेरिकी सीनेट में फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग से सवाल-जवाब भी किए गए थे. बाकी बचे सवालों के जवाब देने के लिए जकरबर्ग को समय दिया गया था. ऐसे सवाल कुल 2 हजार थे. फेसबुक ने अभी इन्हीं सवालों का जवाब दिया है.

फेसबुक ऐसे रखता है यूजर्स पर नजर

डिवाइस इन्फॉर्मेशन: आप जिस कम्प्यूटर, मोबाइल या डिवाइस से फेसबुक लॉगइन करते हैं, उसकी जानकारी फेसबुक को रहती है. जैसे- डिवाइस में कितना स्टोरेज बचा है, कौन-कौन से फोटो हैं, किसके नंबर सेव हैं.

ऐप इन्फॉर्मेशन: फेसबुक को ये भी पता रहता है कि यूजर डिवाइस में कौन-कौन से ऐप मौजूद हैं. यूजर किस ऐप को कितना वक्त देता है.

डिवाइस कनेक्शन: फेसबुक को पता रहता है कि यूजर किस नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है या कौन सा वाई-फाई चला रहा है. फेसबुक डिवाइस जीपीएस पर भी नजर रखता है, जिससे उसे यूजर की लोकेशन मिलती रहे.

बैटरी लेवल: यूजर की डिवाइस के बैटरी लेवल की भी फेसबुक निगरानी करता है. इससे वो पता लगाता है कि फेसबुक ऐप यूजर के डिवाइस की ज्यादा बैटरी तो नहीं ले रहा है. उस हिसाब से ऐप को अपडेट करता है.

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