स्विस बैंक में भारतीयों के पैसे बढ़ने को लेकर कैबिनेट मिनिस्टर पियूष गोयल ने दी सफाई

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नई दिल्ली, स्विस नैशनल बैंक की ओर से जारी नई रिपोर्ट से मोदी सरकार चौतरफा घिरती नजर आ रही है। इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 में स्विस बैंक में भारतीयों का पैसा 50 फीसदी बढ़कर 7000 करोड़ रुपए हो गया है। कालेधन में कमी के मोदी सरकार के दावे के बीच स्विस बैंक के ये नए आंकड़े सामने आए हैं।

1.5 करोड़ रु. देश से बाहर ले जाना वैध
केंद्रीय मंत्री और अभी वित्त मंत्रालय का कामकाज संभाल रहे पीयूष गोयल को इस बढ़ोतरी पर हैरानी नहीं है। उनका कहना है कि 1.5 करोड़ रुपए देश से बाहर ले जाना वैध है। गोयल ने कहा, स्विट्जरलैंड से समझौते के तहत हमें 1 जनवरी 2018 से साल के अंत तक की सभी जानकारियां मिल जाएंगी। ऐसे में पहले से ही इसे ब्‍लैकमनी कहना गलत है। उन्‍होंने आगे कहा, इस पर सरकार की निगाहें हैं और अगर यह ब्‍लैकमनी पाया जाता है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।

मिलेंगी ट्रांजैक्‍शन और टैक्‍स से जुड़ी जानकारियां
बीते साल भारत और स्विट्जरलैंड के बीच एक एग्रीमेंट हुआ था। इसके तहत 1 जनवरी 2018 से दोनों देश ट्रांजैक्‍शन और टैक्‍स से जुड़ी जानकारियों का आदान-प्रदान करेंगे। हालांकि यह भी तथ्‍य है कि 2017 में स्विस बैंकों में भारतीयों की ब्‍लैकमनी में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है। स्विस बैंकों से 2017 की जानकारियां सरकार को मिल सकेंगी या नहीं, इस संबंध में पीयूष गोयल ने जानकारी नहीं दी।

नोटबंदी के बाद बढ़ा कालाधन
ये आंकड़ा इसलिए भी चौंकाता है कि क्योंकि मोदी सरकार आने के बाद लगातार 3 साल कालेधन में कमी आई थी लेकिन 2016 में नोटबंदी का फैसले के बाद इसमें अचानक बढ़ोतरी हुई। स्विस बैंक ने जो आंकड़े जारी किए हैं वह 2017 के हैं और नोटबंदी 8 नवंबर, 2016 को लागू हुई थी यानी साफ है कि नवंबर 2016 और 2017 के बीच सबसे ज्यादा पैसा स्विस बैंक पहुंचा। प्रधानमंत्री ने जब नोटबंदी का ऐलान किया था तब इसे कालेधन के खिलाफ सबसे बड़ी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ बताया गया था।

‘वादा था रुपया 40 पर लाने का, हो गया 69’
विदेशों में जमा कालेधन पर इजाफे की खबरों को लेकर कहा कि ‘अच्छे दिन जुमले बन गए।’ पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘मोदी जी, भारत का रुपया तो कमज़ोर होकर एक डॉलर के मुकाबले ₹69.10 हो गया। वादा था – एक डॉलर 40 रुपये करने का।’ उन्होंने कहा, ‘‘स्विस बैंकों में काला धन 50 फीसदी बढ़कर 7000 करोड़ रुपये हुआ। वादा था विदेशी बैंकों से 100 दिनों में 80 लाख करोड़ रुपये वापस लाने का।’