टीवी एक्ट्रेस का सोशल मीडिया पर छलका दर्द, मुस्लिम होने की वजह से हो रहा है भेदभाव

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मुंबईः छोटे पर्दे की एक मशहूर अदाकारा ने एक हौरान कर देने वाली आपबीती सुनाई है। दरअसल यहां हम अभिनेत्री शिरीन मिर्जा के बारे में बात कर रहे हैं, जिन्हें एकता कपूर के धारावाहिक में एक दमदार किरदार निभाते हुए देखा जा रहा है। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर खुद से जुड़ी एक ऐसी सच्चाई बताई है, जिसे जानकार शायद आप भावुक हो जाएंगे।

एकता कपूर के प्रसिद्ध शो ‘ये हैं मोहब्‍बतें’ में दिव्‍यांका त्रिपाठी की ननद यानी सिमरन का किरदार निभाने वाली एक्‍ट्रैस शिरीन मिर्जा इन दिनों घर न मिल पाने की समस्‍या से जूझ रही हैं। शिरीन ने मुंबई में खुद को घर न मिलने की वजह खुद का मुस्लिम होना, सिंगल होना और एक एक्‍टर होना बताया है। जयपुर की रहने वाली शिरीन पिछले 8 सालों से मुंबई में रह रही हैं। पिछले कुछ दिनों से वह एक घर के लिए परेशान हैं। ऐसे में शिरीन ने अपनी व्‍यथा फेसबुक पर शेयर की है।

शिरीन ने अपना एक फोटो शेयर करते हुए अपने इस पोस्‍ट में लिखा है, ‘मैं मुंबई में एक घर के लायक नहीं हूं क्‍योंकि मैं MBA हूं – मुस्लिम, बेचलर, एक्‍टर।’ शिरीन ने आगे लिखते हुए बताया, ‘यह फोटो तब की है, जब मैं मुंबई में रहना का सपना लेकर इस शहर में आई थी और आज लगभग 8 साल इस शहर में बिताने के बाद मुझे क्‍या सुनने को मिलता है… सबसे पहली बात, हां मैं एक एक्‍टर हूं और मैं न शराब पीती न स्‍मोकिंग करती और कोई क्रिमिनल केस भी मुझपर नहीं है। तो आखिर वह सिर्फ मेरे प्रोफेशन के आधार पर मेरे चरित्र को तय कर सकते हैं? दूसरी बात, मैं सिंगल हूं और जब भी ब्रोकर को कॉल करती हूं वह मुझसे ज्‍यादा किराया मांगते हैं कि जब तक सिंगल हो तुम्‍हें ज्‍यादा पैसा देना होगा। मेरा सवाल है कि बदमाशी तो परिवार भी कर सकता है??? तीसरी बात, मैंने तीसरे व्‍यक्ति को फोन किया तो उसने मुझसे पूछा कि मैं हिंदू हूं या मुस्लिम और फिर कहा, मुस्लिमों को नहीं दे रहे हैं। उन्‍होंने मुझे सलाह दी कि अपने किसी दोस्‍त के नाम से फ्लेट ले लो जो मुस्लिम न हो।’ मुझे समझ नहीं आ रहा कि नाम में क्‍या रखा है? हमारे खून में तो कोई फर्क नहीं है।’

शिरीन ने आगे लिखा, ‘एक शहर जो कभी नहीं सोता वहां घर खरीदना या किराए पर लेना.. एक शहर जो खुद के सभी धर्मों का सम्‍मान करने के चरित्र के चलते जाना जाता है, वह धर्म, प्रोफेशन और आपके वैवाहिक स्थिति के आधार पर भेदभाव करता है। मैं यह देखकर हैरान हूं कि जिस शहर ने मुझे इतना कुछ दिया है और जिसे मैं ‘आमची मुंबई’ कहते हुए नहीं थकती, उसके पास आज मेरे लिए जगह नहीं है। कई बार न सुनने के बाद भारी मन से मैं बस यही कहना चाहुंगी, क्‍या मैं इस शहर से जुड़ी हुई हूं?

 

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