एकादशी को भगवान विष्णु का पूजन करने से नष्ट होते हैं पाप, होती है मोक्ष की प्राप्ति

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पुराणों के अनुसार कार्तिक माह भगवान विष्णु का महीना माना गया है. इस महीने में भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है. इसे देव उठनी एकादशी जिसे प्रबोधनी एकादशी भी कहा जाता है. इसे पापमुक्त करने वाली एकादशी भी माना जाता है. कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी के दिन निम्न फूलों से श्रीहरि भगवान विष्णु का पूजन करने की बात स्वयं ब्रह्माजी ने नारदजी से कहीं है. अत: श्रीहरि विष्णु का पूजन करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के सभी पाप नष्‍ट हो जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

वैसे तो सभी एकादशी पापमुक्त करने वाली मानी जाती हैं, लेकिन इसका महत्व अधिक है. इस दिन से चार माह पूर्व देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। इसके लिए माना जाता है कि भगवान विष्णु समेत सभी देवता क्षीर सागर में जाकर सो जाते हैं। इसलिए इन दिनों पूजा-पाठ और दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। किसी तरह का शुभ कार्य जैसे शादी, मुंडन, नामकरण संस्कार आदि नहीं किए जाते हैं.

ब्रह्म मुहूर्त में जब दो घड़ी रात्रि रह जाए तब उठकर शौचादि से निवृत्त होकर दंत-धावन आदि कर नदी, तालाब, कुआं, बावड़ी या घर में ही जैसा संभव हो स्नानादि करें, फिर भगवान की पूजा करके कथा सुनें। फिर व्रत का नियम ग्रहण करना चाहिए। उस समय भगवान से प्रार्थना करें कि हे भगवन! आज मैं निराहार रहकर व्रत करूंगा। आप मेरी रक्षा कीजिए। बहुत से फूलों, फल, अगर, धूप आदि से भगवान का पूजन करना चाहिए। शंख जल से भगवान को अर्घ्य दें। इसका समस्त तीर्थों से करोड़ गुना फल होता है।

जानिए क्या क्या होता है पूजन से लाभ

1. जो मनुष्य एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं तथा ‍मुक्ति को प्राप्त होते हैं।
 2. जो मनुष्य सफेद या लाल कनेर के फूलों से भगवान का पूजन करते हैं, उन पर भगवान अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
3. जो मनुष्य भगवान विष्णु पर आम की मंजरी चढ़ाते हैं, वे करोड़ों गायों के दान का फल पाते हैं।
4. जो मनुष्य एकादशी को भगवान विष्णु का विवाह तुलसी से कराने पर उसके के विवाह में आने वाली बाधायें ख़त्म हो जाती हैं.
5. जो मनुष्य तुलसी का पौधा लगाते हैं, उनके कुटुम्ब से उत्पन्न होने वाले प्रलयकाल तक विष्णुलोक में निवास करते हैं।
6.जो मनुष्य शमी के पत्र से भगवान की पूजा करते हैं, उनको महाघोर यमराज के मार्ग का भय नहीं रहता।
7. जो मनुष्य दूब के अंकुरों से भगवान की पूजा करते हैं, वे 100 गुना पूजा का फल ग्रहण करते हैं।
8. जो मनुष्य कदम्ब पुष्पों से श्रीहरि का पूजन करते हैं, वे कभी भ‍ी यमराज को नहीं देखते।
9. जो भक्त गुलाब के पुष्पों से भगवान विष्णु का पूजन करते हैं, उन्हें मुक्ति मिलती है।
10. कार्तिक मास में तुलसी दर्शनकरने, स्पर्श करने, कथा कहने, नमस्कार करने, स्तुति करने, तुलसी रोपण, जल से सींचने और प्रतिदिन पूजन-सेवा आदि करने से हजार करोड़ युगपर्यंत विष्णुलोक में निवास करते हैं।
11. जो मनुष्य विष्णु भगवान को चंपा के फूलों से पूजते हैं, वे फिर संसार में नहीं आते।

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